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बेसा–पिपला नगर पंचायत के मुख्याधिकारी श्री भरत बाबूराव नंदनवार के विरुद्ध प्रकाशित समाचारों पर उठे गंभीर प्रश्न

 

विशेष खंडन एवं स्पष्टीकरण प्रेस विज्ञप्ति

बेसा–पिपला नगर पंचायत के मुख्याधिकारी श्री भरत बाबूराव नंदनवार के विरुद्ध प्रकाशित समाचारों पर उठे गंभीर प्रश्न

बिना सक्षम जांच एवं ठोस प्रमाण किसी अधिकारी की छवि धूमिल करना उचित नहीं – नागरिकों की प्रतिक्रिया

नागपुर, प्रतिनिधि।

हाल ही में कुछ समाचार पत्रों, सोशल मीडिया मंचों तथा विभिन्न माध्यमों से नगर पंचायत बेसा–पिपला के मुख्याधिकारी (Chief Officer – मुख्य अधिकारी) श्री भरत बाबूराव नंदनवार के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering – अवैध धन लेनदेन), आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets – आय से अधिक संपत्ति) तथा कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े आरोपों संबंधी समाचार प्रकाशित किए गए हैं।

इन समाचारों के प्रकाशन के बाद नगर पंचायत क्षेत्र सहित विभिन्न सामाजिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में चर्चाओं का दौर प्रारंभ हो गया है।

हालांकि अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आए हैं जिनके आधार पर श्री भरत बाबूराव नंदनवार को प्रत्यक्ष रूप से दोषी ठहराया जा सके।

जानकारों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति अथवा सरकारी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण केवल सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा की गई निष्पक्ष जांच के पश्चात ही किया जा सकता है।

भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई तथा न्यायिक प्रक्रिया का अधिकार प्रदान करता है।

ऐसी स्थिति में बिना अंतिम जांच रिपोर्ट के किसी अधिकारी को दोषी घोषित करना न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन संपत्तियों को लेकर विवाद उत्पन्न किया जा रहा है, उनमें से कुछ संपत्तियां श्री नंदनवार के भाई श्री प्राग बाबूराव नंदनवार के नाम पर बताई जा रही हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार श्री प्राग बाबूराव नंदनवार स्वयं स्वतंत्र व्यवसायी हैं।

उनका अपना निजी व्यापार एवं आय का स्रोत है।

इस कारण किसी भी संपत्ति को सीधे तौर पर मुख्याधिकारी श्री भरत बाबूराव नंदनवार से जोड़ना जांच का विषय हो सकता है, किंतु बिना प्रमाण निष्कर्ष निकालना उचित नहीं कहा जा सकता।

नगर पंचायत क्षेत्र के अनेक नागरिकों ने भी इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

कुछ नागरिकों का कहना है कि श्री नंदनवार ने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न विकास कार्यों को गति प्रदान की है।

क्षेत्र में स्वच्छता, प्रशासनिक व्यवस्था तथा नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में कई सकारात्मक प्रयास किए गए हैं।

कई नागरिकों ने उन्हें एक अनुशासित एवं कार्यकुशल अधिकारी बताया है।

कुछ लोगों का यह भी मत है कि सख्त प्रशासनिक कार्यवाही के कारण कुछ स्वार्थी तत्व असंतुष्ट हो सकते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में किसी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

यदि आरोप सही हैं तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

परंतु यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं तो झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता का विशेष महत्व है।

पत्रकारिता का उद्देश्य सत्य को सामने लाना तथा जनहित की रक्षा करना है।

साथ ही पत्रकारिता की यह भी जिम्मेदारी है कि किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पूर्व उसके तथ्यों का यथासंभव सत्यापन किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर प्रकाशित समाचार किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंचा सकते हैं।

भारत के न्यायालय भी अनेक अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक आरोप विधिवत सिद्ध न हो जाएं।

इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच ही सत्य को सामने ला सकती है।

सामाजिक संगठनों, नागरिकों तथा प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाना चाहिए।

यदि किसी संस्था या व्यक्ति के पास ठोस दस्तावेजी प्रमाण हैं तो उन्हें संबंधित विभागों को प्रस्तुत करना चाहिए।

सिर्फ आरोप लगाना और मीडिया ट्रायल चलाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सर्वोपरि होता है।

कानून के समक्ष सभी समान हैं।

इसलिए किसी भी मामले में अंतिम निर्णय जांच और विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।

विदर्भ नंदन समाचार का मानना है कि जनता को तथ्यात्मक एवं संतुलित जानकारी उपलब्ध कराना मीडिया का कर्तव्य है।

इसी उद्देश्य से यह स्पष्टीकरण प्रकाशित किया जा रहा है।

हम किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष अथवा विपक्ष में निर्णय नहीं दे रहे हैं।

हम केवल यह आग्रह कर रहे हैं कि सत्य तथ्यों को जांच के माध्यम से सामने आने दिया जाए।

यदि भविष्य में किसी सक्षम एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

जनता को भी चाहिए कि अपुष्ट समाचारों पर विश्वास करने से पहले उनके स्रोत एवं प्रमाणों की जांच करे।

सोशल मीडिया के वर्तमान युग में अफवाहें तेजी से फैलती हैं।

इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह केवल प्रमाणित जानकारी को ही स्वीकार करे।

नगर पंचायत बेसा–पिपला क्षेत्र के अनेक नागरिकों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो।

लेकिन यदि आरोप झूठे हैं तो संबंधित व्यक्तियों की प्रतिष्ठा की रक्षा भी होनी चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारियों पर निराधार आरोप लगाना शासन व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

साथ ही इससे जनता का विश्वास भी प्रभावित हो सकता है।

इसलिए प्रत्येक पक्ष को संयम एवं जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

अंततः सत्य वही माना जाएगा जो जांच और प्रमाणों के आधार पर स्थापित होगा।

विदर्भ नंदन समाचार निष्पक्ष पत्रकारिता के अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए इस विषय पर आगे भी तथ्यात्मक जानकारी जनता तक पहुंचाता रहेगा।

जनहित, पारदर्शिता तथा सत्य की रक्षा ही हमारी प्राथमिकता है।

– विदर्भ नंदन समाचार

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