बिहार मे चल रहा है जंगल राज! तिवारी एन्काऊंटर ने देश की उडाई नींद…
संविधान मौलिक अधिकार कलम 19 अभिव्यक्ती स्वातंत्र्य का बिहार पोलीस ने घोटा गला..
देश वासियों की सेवा करणे निकले निष्पक्ष युवक की एन्काऊंटर के नाम पर ली जान…?
मानवाधिकारों का खुल्ले से बिहार पोलीस द्वारा हनन…
बिहार /भोजपूर :- गंगा के तेज बहाव से हरसाल पानी में डूब जाने वाले जिनोनिया गाव कॊ शहापूर थाना के बिलौटी गाव मे भोजपुर डी एम एव प्रशासन द्वारा विस्थापीत किया गया और यह सब बिलौटी का रहने वाला भरत तिवारी,यह विस्थापित इस गाव के पुनर्वसन और गरिबों के हक्क के लिए लढणे वाले; पिंडदान कर देश सेवा के लिए निकले, युवक को आयएएस डी एम, एव आयपीएस अधिकारी द्वारा जो देश के सर्वोच्च स्थान पर होकर कानून व्यवस्था जिंके हाथ मे होती है, सविधानिक मूल्योन का जतन ये ऊनका मौलिक कर्तव्य होता है, उसी पोलीस आलाधिकारीयों ने, एक तिवारी नामक युवक अपने गाव मे विस्थापित लोगों के पुनर्वसन हेतू, समस्याओंको लेकर व्हिडिओज बनाकर प्रशासन के प्रति- विरोध दरसाकर, गाव वालों की आवाज बनता था| उसी कॊ मानसिक रोगी बताते हुए, एस पी ऑफीस के तरफ से एक प्रेस नोट रिलीज कर ,इलाज के नाम पर धर- दबोच; गोली मार, बताया एन्काऊंटर ! इस हादसेने मानवता को सर्मसार कर दिया है। पीडित द्वारा फेसबुक पर ‘लाइव’ आकर तमंचा( पिस्टल ) हात मे लिए अपनी मांगो को, मांग; प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई, यह गैर कानूनी था | मगर क्रांतिकारी की तरह था, प्रशासन द्वारा गरीबो की बस्ती को उजाड कर किया गया पुनर्वसन यह सुविधाओके न होने से,मौलिक अधिकार छिन्ने वाला था | और देश की सत्ता पक्ष-विपक्ष इनसे न्याय की गुहार थी| उसे पकडणे आई पोलीस ने उसकी मांग मानकर उसके हाथ से रिवाल्वर नीचे डालकर, खुद को आत्म समर्पित करवाया, इस घटना को एन्काऊंटर पीडित (तिवारी) द्वारा फेसबुक पर ऑनलाइन होकर अंजाम दिया गया था | इस वजह से देश के नागरिको तक एक पोलीस और पीडित का खुलासा पोहोच पाया|
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गरिबों के हक्क के लिये उठाइ थी तिवारी इस युवक ने आवाज ! जो आज हमेशा के लिए बिहार पोलीस ने बंद कर दी है| क्या देश का कानून इतना अंधा- बहरा और लंगडा हो चुका है? जहा मानवाधिकार या अभिव्यक्ती स्वतंत्रता कोई महत्व नही रहा है, इस और देश की जनता सरकार से पूछ रही सवाल | मालूम होता है यह नवजवान देश सेवा के लिए अपने आपको समर्पित कर अन्याय – अत्याचार के खिलाफ लडने की कसम खाई हो! ऐसे सिस्टम के खिलाफ लड पडा था | वह आजाद भारत में खुद को भगतसिंग- राजगुरू- सुखदेव जैसा क्रांतिकारी मानकर सडेगले सिस्टम के खिलाफ लढणे निकला था| मगर सिस्टम ही उसे निगल गया
व्हिडिओ फेसबुक पर लाइव व्हिडिओ येह बता रहा है कि, तिवारी बात करना चाहता था पोलीस प्रशासन से और सिस्टम से इसीलिए उसने यह एक जरिया अपणाया हुआ था अपनी आवाज बुलंद करने के लिए| वह गरीबों के झोपळो के लिए हक्क के लिए बार – बार एसडीएम जिल्हा प्रशासनसे न्याय की गुहार लगा रहा था| और इसी बीच उस पर यह घात पात पोलीस द्वारा किया गया ऐसा बोला जाता है | बिहार पोलीस ने फिर देश का नाम नीचा किया | देश का जागृत नवजवान सवाल पूछता है क्या बेरोजगार पडे लिखे युवा जागृत हो जाते है और अपने हक्क के लिए आवाज उठाते है, क्या उन्हे इसी तरह सर अंग्रेज सरकार की तरह मार दिया जाता है? भारत मे हूकुमशाही है या लोकशाही है?ये सोचने पर विवस आज हर एक भारतीय है|
बिहार पोलीस के सामने हत्यार डालचुके नीहत्ते lतिवारी नामक नौजवान को जिल्हा प्रशासन तथा पोलीस प्रशासन ने ना समजते हुए, अपने रास्ते का रोडा समज साफ कर दिया | जो एक मानवाधिकारोंका हनन और सरासर जुर्म हैं| जिसके सजा के तौर पर उस थाना प्रभारी को महज निलंबित कर दिया जाता है। तिवारी यह नवजवान अपने व्हिडिओज के माध्यम से सरकार और अधिकारी, इंके अन्याय की दास्ता सुनाता था, उसके लिए सोशल मीडिया यह एक माध्यम उसने चुना था| यही माध्यम उसकी पहचान और उसकी हकीकत बया करती है। जो देश को रोने पर मजबूर कर प्रशासन की घोरनिंदा करती है| अंग्रेजो के समय में जिस तरह क्रांतिकारी मारे जाते थे इस युग मे भी युवा इनफ्लूएन्सरों को जो सच की बात करते है, देश की बात करते है, अपने हक्क की बात करते है, दुसरो के हक्क के लिये लढते है, उन्हें देशद्रोही आतंकवादी, सहरी नक्षलवादी घोषित कर इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया जाता है,यह सरासर मानवता को सर्मसार करदेने वाली घटना है। सारे देश वासियों की और से दोसियोंको फासी की सजा देकर पीडित को न्याय दे ऐसी मांग की जा रही है |




