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Association बिस्किट कंपनी में श्रमिक की करंट लगने से मौत क्या श्रमिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी हादसे की वजह?

सरकारी नियमों और श्रमिकों के अधिकारों पर
गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

नागपुर : एमआईडीसी क्षेत्र में स्थित Association बिस्किट कंपनी के गोदाम में एक युवा श्रमिक की करंट लगने से हुई मौत ने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कंपनी में कार्यरत लगभग 23 वर्षीय श्रमिक संदीप मरावी की करंट लगने से मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि मृतक श्रमिक मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के केदारपुर क्षेत्र का निवासी था।

एक युवा मजदूर अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने नागपुर आया था।

लेकिन कार्यस्थल से जुड़ी एक दर्दनाक दुर्घटना में उसकी जान चली गई।

इस घटना ने मृतक के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

साथ ही औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए थे?

क्या विद्युत वायरिंग, बिजली बोर्ड, अर्थिंग और अन्य विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच की जाती थी?

क्या कंपनी में श्रमिकों को विद्युत सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया था?

क्या श्रमिकों को कार्यस्थल पर संभावित खतरों के बारे में जानकारी दी गई थी?

क्या कंपनी में नियमित सुरक्षा निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट किया जाता था?

क्या संबंधित सरकारी विभागों द्वारा कंपनी का समय-समय पर निरीक्षण किया गया था?

यदि निरीक्षण किया गया था तो क्या उसमें कोई कमी पाई गई थी?

यदि कमी पाई गई थी तो उसे दूर करने के लिए कंपनी को क्या निर्देश दिए गए थे?

और यदि कोई कमी नहीं पाई गई थी तो इतनी गंभीर दुर्घटना कैसे घटित हुई?

यह सभी प्रश्न अब जांच का विषय हैं।

प्रथमदृष्टया यह मामला केवल एक दुर्घटना मानकर समाप्त कर देना उचित नहीं होगा।

क्योंकि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान में श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

श्रमिकों को सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

कार्यस्थल पर विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन करना आवश्यक है।

सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।

श्रमिकों को सुरक्षा प्रशिक्षण देना आवश्यक है।

खतरनाक परिस्थितियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना आवश्यक है।

इसके बावजूद यदि किसी श्रमिक की जान चली जाती है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

मृतक श्रमिक के परिवार को न्याय मिलना आवश्यक है।

परिवार को कानून के अनुसार मिलने वाली सहायता और मुआवजे की भी जांच होनी चाहिए।

यह भी जांच का विषय है कि मृतक श्रमिक कंपनी का प्रत्यक्ष कर्मचारी था या ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत था।

यदि वह ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत था तो ठेकेदार और मुख्य कंपनी की जिम्मेदारियों की भी जांच होनी चाहिए।

मृतक का नियुक्ति रिकॉर्ड उपलब्ध था या नहीं?

उसका वेतन रिकॉर्ड क्या था?

उपस्थिति रजिस्टर में उसका नाम दर्ज था या नहीं?

क्या कंपनी ने श्रमिकों का आवश्यक रिकॉर्ड रखा था?

क्या श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी लिखित निर्देश दिए गए थे?

क्या कंपनी में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध थी?

क्या दुर्घटना के बाद तुरंत आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई?

इन सभी प्रश्नों का उत्तर जांच के माध्यम से सामने आना चाहिए।

विदर्भ नंदन समाचार पत्र का स्पष्ट मत है कि किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान को श्रमिकों की सुरक्षा के साथ समझौता करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

किसी भी कंपनी का उत्पादन और व्यापार श्रमिकों की जान से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकता।

यदि जांच में कंपनी प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

यदि विद्युत सुरक्षा में कमी पाई जाती है तो संबंधित विद्युत विभाग द्वारा भी जांच की जानी चाहिए।

यदि श्रम कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है तो श्रम विभाग को भी कार्रवाई करनी चाहिए।

यदि फैक्टरी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित निरीक्षण विभाग को भी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

यदि किसी अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से पालन नहीं किया है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान को सरकारी नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता।

श्रमिकों के अधिकारों को ताक पर रखकर किसी कंपनी का संचालन नहीं किया जा सकता।

मजदूर केवल उत्पादन का साधन नहीं हैं।

वे भी इंसान हैं और उनके जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सरकार द्वारा श्रमिकों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून और नियम बनाए गए हैं।

इन नियमों का पालन कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

लेकिन यदि निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह जाए तो दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।

Association बिस्किट कंपनी में हुई घटना की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

जांच में कंपनी के सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

विद्युत व्यवस्था की जांच की जानी चाहिए।

श्रमिकों के प्रशिक्षण रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

कंपनी के लाइसेंस और अनुमति पत्रों की जांच की जानी चाहिए।

श्रमिकों की नियुक्ति और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

ठेकेदार व्यवस्था की भी जांच की जानी चाहिए।

घटना से पहले कंपनी का सरकारी निरीक्षण हुआ था या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मृतक श्रमिक के परिवार को कानून के अनुसार मिलने वाली सहायता की जानकारी दी जानी चाहिए।

जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

लेकिन दुर्घटना को साधारण घटना बताकर मामले को दबाना भी उचित नहीं होगा।

विदर्भ नंदन समाचार पत्र मृतक श्रमिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।

साथ ही संबंधित पुलिस विभाग, श्रम विभाग, फैक्टरी निरीक्षण विभाग और विद्युत सुरक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग करता है।

मृतक के परिवार को न्याय और उचित सहायता मिलनी चाहिए।

यदि किसी की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

श्रमिकों की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

विदर्भ नंदन समाचार पत्र इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेगा।

कंपनी प्रबंधन का पक्ष भी निष्पक्ष रूप से प्राप्त किया जाएगा।

क्योंकि किसी भी समाचार को प्रकाशित करने से पहले सभी संबंधित पक्षों का पक्ष जानना पत्रकारिता का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

जनहित में सच्चाई सामने आना आवश्यक है।

श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

अब देखना यह है कि संबंधित सरकारी विभाग इस गंभीर घटना पर क्या कार्रवाई करते हैं।

क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा वास्तविक जांच की जाती है?

क्या कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाती है?

क्या मृतक श्रमिक के परिवार को न्याय मिलता है?

इन सभी सवालों के जवाब अब सरकारी जांच से ही सामने आएंगे।

  1. — विदर्भ नंदन समाचार पत्र —
    जनहित में जारी

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